थानै अर थारा सगळा परिवार नै सातुड़ी तीज री घणी-घणी राम-राम अर हार्दिक शुभकामणावां सा।
सावण री फुहारां, माटी री सोंधी खुशबू, झूलां री पींग अर म्हारां लोकगीतां री मिठास… सातुड़ी तीज म्हारे राजस्थान री धरती रो वो पावणो त्योहार है, जिको हर नारी नै बेसब्री सूं इंतजार रहै।
तीज आवै तो म्हारै गांव-ढाणी में अलग ही रौनक छा जावै।
आंगण में रंगोळी सजै, हाथां में मेहंदी रचै, माथै बिंदणी दमकै, चूड़ियां खनकै अर झूला पड़ै।
म्हारी मायड़ री बेटियां अर बहू-बेटियां सज-धज कै तीज रो त्योहार मनावै। सखियां एक-दूजी नै बोलावै, झूला झूलै अर गिण-गिण कै तीज रा गीत गावै—
“तीज आयी रे सावण री,
मन में उमंग ल्यायी रे…”
सातुड़ी तीज केवल रीति-रिवाज रो त्योहार कोनी, ई तो प्रेम, विश्वास, समर्पण अर पारिवारिक संस्कारां रो पावणो संदेश है।
माता पारवती जी अर भोळेनाथ नै आदर्श दांपत्य जीवन रो प्रतीक मान्यो जावै। माता पारवती री अटूट भक्ति अर भगवान शिवजी रो आशीर्वाद हर दांपत्य जीवन में प्रेम, विश्वास अर सुख-शांति बणाय रखै—ई म्हारी संस्कृति री सुंदर भावना है।
तीज पर सुहागणां अपणा साजन री लम्बी उमर, सुखी परिवार अर अखंड सुहाग री कामणा करै।
मायड़ो आशीष मिलै, बड़ां रो आशीर्वाद रहै, साजन रो साथ मिलै अर परिवार री ममता-स्नेह सदैव बण्या रहै—इण सूं बड़ी खुशी अर के बात हो सकै है।
संस्कृति में त्योहार केवल उत्सव कोनी, रिश्तां नै जोड़ण रो अवसर भी है। तीज पर बेटियां पीहर आवै, मायड़ो मन हरखै, भाई-बहिण री प्रीत बढ़ै अर पूरा परिवार प्रेम री डोर में बंध जावै।
आज जरूरत है कि म्हारी मायड़ भाषा, लोकपरंपरा, रीति-रिवाज अर संस्कारां नै अगली पीढ़ी तक पहुंचावां। आधुनिकता अपनी जगह है, पण म्हारी पहचान म्हारी संस्कृति सूं है।
जिको आपणी जड़ां नै भूल जावै, वो आपणी पहचान नै धीरे-धीरे खो देवै।
आओ, इण सातुड़ी तीज पर आपण सब मिलकै ई संकल्प लेवां—
हर घर में प्रेम अर सम्मान रहै।
हर नारी नै मान-सम्मान अर बराबरी रो अधिकार मिलै।
परिवार में बड़ां रो आशीर्वाद अर छोटां रो स्नेह बण्या रहै।
म्हारी मायड़ भाषा अर लोकसंस्कृति सदैव जीवंत रहै।
हर आंगण में सुख, शांति, समृद्धि अर खुशियाळी रहै।
माता पारवती अर भोळेनाथ जी सूं अरदास है कि थारा घर-आंगण सदा खुशियाळ रहै, थारी जिंदगी में सुख-समृद्धि री बहार रहै, दुःख-दर्द थारै द्वार तक भी नी आवै अर प्रेम रो दीप सदा जगमगातो रहै।
बड़ां रो आशीर्वाद, परिवार रो स्नेह अर अपणां री दुआ—ई जीवन री सगळातै बड़ी दौलत है।
सातुड़ी तीज री थानै अर थारा सगळा परिवार नै घणी-घणी बधाई अर हार्दिक शुभकामणावां सा।
म्हारा लिखण में जाण-अजाण में कदे कोई बात ऊणी-ज्यादा लिखी गी होय, म्हारा कुणा बोल सूं थांका मन दुख्यो होय, अथवा म्हारै सूं कुणी भूल-चूक होई गी होय, तो म्हानै आपणो माणस समझकै दिल सूं माफ कर दिज्यो सा। म्हारै मन में कुणा वास्ते राग-द्वेष कोनी, ना कुणा नै दुख देण री भावना… बस म्हारो मन साफ है अर अपणां री प्रीत अर मान-सम्मान सदा बण्यो रहै, ई म्हारी दिल री सच्ची आस है।
इण पावणै तीज रै दिन, मन री सारी खटास भूलकै, एक-दूजा नै प्रेम अर अपनापन देवां—इणै सूं बड़ी तीज अर के हो सकै सा!
थांका सगळां नै फेर सूं सातुड़ी तीज री घणी-घणी राम-राम सा।
थांका आपणा,
सुधाकर चौधरी
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